कोल्हान विश्वविद्यालय का यह छठा दीक्षांत समारोह कई मायने मे ऐतिहासिक और विशिष्ट है
स्थापना के बाद से अब तक हम पाँच दीक्षांत समारोह आयोजित कर चुके हैं किन्तु ये सभी समारोह आधारभूत संरचना के अभाव में हमें विश्वविद्यालय परिसर से बाहर करवाना पड़ा । हमें इस बात की प्रसन्नता है कि आज पहली बार दीक्षांत समारोह हमारे अपने परिसर के इस भव्य सभागार में आयोजित हो रहा है

कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के छठे दीक्षांन्त समारोह (26 नवम्बर, 2025) के अवसर पर प्रो० (डॉ०) अंजिला गुप्ता कुलपति कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा का संबोधन

सिंहभूम सिंहभूम चाईबासा- कोल्हान विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह के इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी विद्यानुरागियों के मध्य उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष और गर्व का अनुभव हो रहा है। इस अवसर पर झारखंड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति सह महामहिम राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार महोदय मुख्य अतिथि के रूप में हमारे मध्य उपस्थित हैं, मैं विश्वविद्यालय परिवार की ओर से उनका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करती हूँ। प्रतिभा संपन्न विद्यार्थियों से सुशोभित दीक्षांत समारोह के सभागार में यशस्वी व्यक्तित्व की उपस्थिति सदैव प्रेरणादायी होती है।
आपके विद्वतापूर्ण अभिभाषण एवं अनुभवजन्य ज्ञान के मार्ग दर्शन से निश्चित रूप से विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। प्राचीन गुरुकुलों की परंपरा रही है कि शिक्षा दीक्षा के समापन के पश्चात् कुलगुरु द्वारा शिष्यों को ससम्मान उपाधि प्रदान की जाती थी। भारत के प्रथम दीक्षांत समारोह का उल्लेख तैत्तिरीय उपनिषद में प्राप्त होता है जहाँ ‘सत्यं वद, धर्मं चर’ सदृश चरित्र निर्माण की उपदेशात्मक शुभकामनाएँ प्रदान की जाती थी। आज हम सभी इस प्रतिष्ठित भारतीय परंपरा के निर्वहन के लिए यहाँ एकत्रित हुए हैं।

कोल्हान विश्वविद्यालय का यह छठा दीक्षांत समारोह कई मायने मे ऐतिहासिक और विशिष्ट है। स्थापना के बाद से अब तक हम पाँच दीक्षांत समारोह आयोजित कर चुके हैं किन्तु ये सभी समारोह आधारभूत संरचना के अभाव में हमें विश्वविद्यालय परिसर से बाहर करवाना पड़ा । हमें इस बात की प्रसन्नता है कि आज पहली बार दीक्षांत समारोह हमारे अपने परिसर के इस भव्य सभागार में आयोजित हो रहा है
मैं आज इस ऐतिहासिक दीक्षोत्सव के अवसर पर इस सभागार में उपस्थित 2021 से 2024 तक के उन सभी 195 उपाधि प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को अन्तर्मन से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देती हूँ जिन्होंने वर्षों की अथक स्वाध्याय-साधना, समर्पण, लगन, आत्मविश्वास और अनुशासन से इस स्वर्णिम सफलता को साधा है। साथ ही उन सभी मार्गदर्शकों, शिक्षकों एवं अभिभावकों का भी हार्दिक
अभिनन्दन करती हूँ जिन्होंने सही मायने में अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है।

हमारा झारखंड प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से अत्यंत समृद्ध है। यह प्रदेश खनिज, वनसंपदा, जल संसाधन और जैव विविधता की अपार निधि से सम्पन्न है। लेकिन हम इन संसाधनों का न्यायपूर्ण और सतत् उपयोग तभी कर सकते हैं जब शिक्षा और समाज के समग्र विकास में बौद्धिक संपदा के आधार स्तंभ-स्वरुप शैक्षिक संस्थानों की भूमिका सार्थक हों। वर्तमान भारतीय शिक्षा नीति NEP-2020 में अनेकता में एकता से सम्पृक्त भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार, नवोन्मेषी प्रतिभाओं के विकास, सतत् शिक्षा, कौशल विकास और सूचना प्रौद्योगिकी का सम्यक् समन्वय है। इसमें मातृभाषा में शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य पर विशेष दृष्टि है। जिसके माध्यम से विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को साधा जा सकता है। मुझे प्रसन्नता है कि हमारा कोल्हान विश्वविद्यालय इस दिशा में एक सशक्त पहल कर रहा है। यह ज्ञान, संस्कृति और तकनीकी प्रगति का सेतु बनकर उभर रहा है। NEP-2020 मानक और प्रावधान के अनुसार चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को अपने विश्वविद्यालय में भलीभाँति लागू कर दिया गया है। ‘सा विद्या या समृद्धये’ (विद्या वही जो समृद्धि लाये) के आदर्श के साथ सन् 2009 में रांची विश्वविद्यालय से विभक्त होकर उच्च शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जनजातीय संस्कृति बहुल कोल्हान अंचल में कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इसलिए यह विश्वविद्यालय विशेष रूप से जनजातीय समाज की शैक्षिक समृद्धि लाने में सदैव प्रयासरत है।

विश्वविद्यालय का प्रयास है कि समाज के प्रत्येक वर्ग अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से बालिकाओं तक उच्च शिक्षा का प्रकाश पहुँचे। शिक्षाविदों का कथन है विद्यार्थियों को दी गई सही शिक्षा से स्वस्थ एवं सशक्त समाज तथा राष्ट्र का निर्माण होता है।

राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (NAAC) द्वारा कोल्हान विश्वविद्यालय को वर्तमान में बी ग्रेड प्राप्त है। इसके अंतर्गत 20 अंगीभूत महाविद्यालय और 34 संबद्धता प्राप्त महाविद्यालय संचालित हैं। वर्तमान में सीमित संसाधन के बावजूद विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में 80,000 से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत है। विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले अधिकतर महाविद्यालय सुदूर-देहातों में अवस्थित है, इसलिए विश्वविद्यालय, शिक्षा के साथ-साथ ग्राम्य संस्कृति और समाज के उत्थान के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। साथ ही आदिम जनजाति के छात्र-छात्राओं और अन्य निर्बल वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने हेतु भी अत्यंत संवेदनशील है।

विश्वविद्यालय का विजन
हमारा विज़न (Vision) है कि हम अपने पोषक क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएँ। इसके माध्यम से उनकी प्रतिभा को पोषित करना, बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना और सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिक
[27/11, 12:09 pm] नागेंद्र कुमार मानगो प्रेस: बनाना है। भारतीय ज्ञान परंपरा के वाहक तत्त्वों को क्रियान्वित करना हमारा लक्ष्य है।
मिशन
हमारा मिशन भारतीय ज्ञान और मूल्य पर आधारित ‘जुमिद तेबो ताहेना’ (हम मिलकर रहें) की भावना के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उत्कृष्टता प्रदान करना है, ताकि सकारात्मक दृष्टि, सहयोगात्मक अनुसंधान और वैश्विक मानकों के ज्ञान निर्माण के माध्यम से ग्राम्य मूल्य को सजीव रखते हुए शैक्षिक उच्चता को प्राप्त किया जा सके। आगामी वर्षों में उपलब्ध संसाधनों के इष्टतम उपयोग के द्वारा विश्वविद्यालय को उत्कृष्ट से उत्कृष्टतर बनाने का लक्ष्य है।

्संचालित पारंपरिक पाठ्यक्रम कोल्हान विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों तथा विभिन्न अंगीभूत एवं संबद्धताप्राप्त महाविद्यालयों में स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी, संस्कृत, बांग्ला, संताली, ओड़िया, उर्दू, अंग्रेजी, दर्शनशास्त्र, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, संगीत, गृहविज्ञान, गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणिशास्त्र के अलावा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा साहित्य के अंतर्गत हो, कुरमाली, कुडूख और मुंडारी की पढ़ाई हो रही है।
व्यावसायिक पाठ्यक्रम
शिक्षा और रोजगार के बीच तारतम्यता स्थापित करने के उद्देश्य से हमारे विश्वविद्यालय में कई व्यावसायिक पाठ्यक्रम
है। इस प्रकार के पाठ्यक्रम के द्वारा विद्यार्थियों को किसी विशेष विषय या उससे जुड़े व्यवसाय में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त होते हैं। इसी उद्देश्य से कई पाठ्यक्रम संचालित हैं जिनमें BCA, MCA, BBA, MBA, B.Ed, M.Ed आदि उल्लेखनीय है।
डिप्लोमा/सर्टिफिकेट कोर्स
विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग से ‘डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग’ का एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स संचालित हो रहा है।
शैक्षणिक सुविधाएँ
विश्वविद्यालय परिसर की प्रशासनिक गतिविधियों को सम्यक् संचालित करने एवं शिक्षण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पूरे विश्वविद्यालय परिसर को यथाशीघ्र वाईफाई से युक्त करने की योजना है। पुस्तकालयों को अद्यतन एवं अत्याधुनिक प्रणाली से संचालित तथा प्रयोगशालाओं को आधुनिक उपकरण से सुसज्जित करने तथा सभी कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड लगाना हमारी प्राथमिकताओं में सम्मिलित है।
आधारभूत संरचना
‘नहि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते’ अर्थात ज्ञान से बढ़कर कोई पवित्र वस्तु नहीं है। इसलिए पुस्तकालय किसी भी विश्वविद्यालय का मेरूदंड होता है। विश्वविद्यालय के सभी विभागों के पास अपना एक स्वतंत्र पुस्तकालय है और विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक तकनीकों से युक्त एक केंद्रीय पुस्तकालय है। साथ ही साथ पुस्तकों एवं पत्रिकाओं
का समृद्ध संग्रह है। हमारे केंद्रीय पुस्तकालय में करीब 20,000 पुस्तकें उपलब्ध हैं जिनमें से लगभग 6000 रेफरेंस बुक्स हैं। ‘ऑनलाइन पब्लिक एक्सेस कैटलॉगिंग’ (OPAC) के माध्यम से बड़ी सरलता से विद्यार्थियों को सर्च फैसिलिटी प्रदान की जाती है। शोध की गुणवत्ता के निर्धारण के लिए इस सेंट्रल लाइब्रेरी में UGC INFLIBNET द्वारा विकसित Plagiarism Detection Tool – ‘DRILL BIT’ है। पुस्तकालय द्वारा पीएच.डी. अवार्डेड थीसिस को ‘शोधगंगा’ में अपलोड कर दिया जाता है ताकि अन्य शोधार्थी एवं विद्यार्थी उसका अवलोकन कर सकें, सीख सकें।
स्मार्ट क्लासरूम
विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों के साथ-साथ अंगीभूत महाविद्यालयों में भी स्मार्टबोर्ड से युक्त क्लासरूम है जिनके माध्यम से विद्यार्थी अपने सीखने के अनुभव को उन्नत बनाते हैं। कोल्हान विश्वविद्यालय पठन-पाठन की आधुनिकतम तकनीक जैसे ऑडियो विजुअल टूल्स एवं इंटरएक्टिव तकनीकों के प्रयोग को बढ़ावा दे रहा है।
परीक्षा प्रणाली
परीक्षा विभाग द्वारा सीमित संसाधनों के साथ परीक्षा संपादित करना बड़ी चुनौती होती है। पिछले कुछ वर्षों में अनेकानेक कारणों से परीक्षा सत्र अनियमित रहा है परंतु इस दिशा में विशेष प्रयास किये जा रहे हैं कि यह पूर्णतः नियमित हो सकें। इन्हीं प्रयासों का सुफल है कि इस छठे दीक्षांत समारोह में हम 2021, 2022, 2023 एवं 2024-इन चार सत्रों के उत्तीर्ण शिक्षार्थियों को उपाधि प्रदान कर पा रहे
हैं। मैं परीक्षा विभाग के सभी पदाधिकारीगण एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की सराहना करती हूं। कोल्हान विश्वविद्यालय की पी-एच.डी. प्रवेश परीक्षा 2022 के लंबित परीक्षाफल को प्रकाशित कर दिया गया है और शोध की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हम अभी शोधार्थियों को कोर्स वर्क करा रहे हैं। साथ ही आगामी पी-एच.डी प्रवेश परीक्षा की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। शोध कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कोल्हान विश्वविद्यालय में पहली बार Research & Development (R&D) Cell का गठन किया गया है और Research Director की नियुक्ति की गई है।
एनसीसी एवं एनएसएस
जहाँ राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट ‘एकता और अनुशासन’ की भावना को आत्मसात कर व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ राष्ट्रनिर्माण में संलग्न है, वहीं ‘मैं नहीं, बल्कि आप’ की सेवा-भावना से संचालित कोल्हान विश्वविद्यालय की एन.एस.एस इकाई निरंतर समाज एवं राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रही है।
रक्तदान शिविर, लैंगिक समानता, स्वच्छ भारत मिशन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, टीबी मुक्त भारत, नशा मुक्ति और एड्स जागरूकता अभियान, जैसे कार्यक्रम आयोजित करती रहती है। 2024-25 सत्र में विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की टीम ने विभिन्न महाविद्यालयों में रक्तदान शिविर का आयोजन कर 1000 यूनिट ब्लड का संकलन कर अपनी
दृढ़ सेवा भावना का परिचय दिया है। विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट और एनएसएस के स्वयंसेवक प्रतिवर्ष दिल्ली के रिपब्लिक डे परेड में सम्मिलित होते हैं।
खेलकूद
कोल्हान विश्वविद्यालय के छात्र कुमार कुशाग्र और मनीषी ने रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से राष्ट्रीय पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय की क्रिकेट टीम लगातार पूर्वी क्षेत्र और ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में भाग ले रही है। हमारी तीरंदाजी टीम ‘खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ में चार सत्र से गोल्ड सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त करने में सफल हुई है। टीम 2019-20 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी तीरंदाजी चैंपियन रही। हमारी क्रिकेट टीम 2022-23 में ईस्ट जोन इंटर-यूनिवर्सिटी क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची। विश्वविद्यालय की छात्रा तीरंदाज कोमालिका बारी और अंकिता भगत ने विश्व कप महिला तीरंदाजी में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। यह हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
विश्वविद्यालय का आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ – IQAC, शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने एवं गुणवत्ता प्रणाली को बेहतर करने के लिए सदैव प्रयत्नशील है। हमें पूर्ण विश्वास है कि हम राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (NAAC) से बेहतर ग्रेड प्राप्त करेंगे।
अन्य सुविधाएं
विश्वविद्यालय में सुदूर ग्रामीण एवं राज्य के विभिन्न क्षेत्र से आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास की व्यवस्था है। विश्वविद्यालय प्रतिभाओं के संवर्धन के लिए स्नातकोत्तर के टॉपर्स को एक सत्र के लिए विशेष मानदेय प्रदान कर शिक्षण सहायक के रूप में पढ़ाने का अवसर प्रदान कर रहा है।
भावी योजनाएँ –
विश्वविद्यालय की उन्नति हेतु हमारे पास अनेक योजनाएँ हैं। परिसर में जनजातीय कला, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से नए जनजातीय भवन एवं एम.एड. बिल्डिंग निर्माण की योजना है। शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देना, विश्वविद्यालय को नैक (NAAC) से बेहतर ग्रेड प्राप्त करना हमारा मुख्य उद्देश्य है। संपूर्ण देश डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को साकार करने में लगा हुआ है। ऐसे में हमारे विश्वविद्यालय की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। आने वाले वर्षों के लिए हमने कई बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिन्हें प्राप्त करने के लिए हमने ठोस कार्य-योजना तैयार की है।
मेरे प्रिय छात्र-छात्राओं, मैं आज के इस शुभ अवसर पर भारत में दीक्षांत की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करना चाहती हूँ। तैत्तिरीय उपनिषद् की शिक्षा-वल्ली के ग्यारहवें अनुवाक में इस बात का वर्णन है कि दीक्षांत के अवसर पर कैसे एक गुरु द्वारा अपने शिष्यों को सम्यक् आचरण की शिक्षा दी जाती है। मैं उस प्रथम दीक्षांत की कुछ आदर्श पंक्तियों को आप सबके समक्ष रखती हूँ जो भारतीय ज्ञान परम्परा की मूल्य समन्वित शिक्षा का आधार स्तंभ है- सत्यं वद। धर्मं चर। मातृदेवो भव। पितृदेवो भव । आचार्यदेवो भव । अतिथिदेवो भव । अर्थात हम सदा सत्य बोलें, धर्म का आचरण करें। माता-पिता और गुरुजनों को देवतुल्य समझें तथा अतिथियों का हमेशा सम्मान करें।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि कोल्हान विश्वकुल के सुधी-शिक्षकवृन्द भारतीय परम्परा के सर्वविध ज्ञान के लिए अपने कर्तव्य का सम्यक् निर्वहन करेंगे। मुझे विश्वास है कोल्हान विश्वविद्यालय, जनजातीय समाज, साहित्य और संस्कृति के परिपोषण में अपने कर्तव्य का सुपालन करेगा।
अंत में पुनः, सभी स्वर्ण पदक उपाधि धारकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप आर्थिक, सामाजिक, भौतिक एवं शैक्षिक गुणों के साथ-साथ आध्यात्मिक-लब्धि के गुणों से परिपूर्ण होकर समुन्नत राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
अपने प्रतिवेदन के समापन से पूर्व मैं एक बार पुनः महामहिम कुलाधिपति के प्रति सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार की ओर से विनम्र कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ जिनकी कृपापूर्ण सहमति और उपस्थिति से आज का दीक्षांत समारोह सार्थक और संभव हो पाया है। आप सभी का पुनः हार्दिक स्वागत और बहुत-बहुत धन्यवाद
सा विद्या या समृद्धये ‘ के जिस मूल मंत्र को ध्यान में रखकर कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना 2009 ईस्वी में की गई थी उस ध्येय को ध्यान में रखते हुए जनजातीय समुदाय के शैक्षणिक विकास एवं रोजगार के लिए निरन्तर प्रयास किया जा रहा है।
रोजगारपरक शिक्षा, स्मार्ट वोर्ड एवं कक्षों की व्यवस्था विभागों एवं महाविद्यालयों में की गई है। आगे भी नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा एवं रोजगार के मध्य समन्वय का प्रयास जारी रहेगा।
प्रो,(डा अंजिला गुप्ता)
कुलपति, कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा




