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घाटशिला उप चुनाव में त्रिकोणात्मक मुकाबला, सभी पार्टी जीत का कर रहे दावा

घाटशिला उप चुनाव में 11 नवंबर को मतदान शांतिपूर्ण सम्पन्न होने के बाद लोग 14 नवंबर को मतगणना का इंतजार कर रहे हैं और अपने अपने प्रत्याशियों की जीत होने का पार्टी के नेता और कार्यकर्ता दावा कर रहे हैं । वैसे देखा जाय तो घाटशिला में मुख्य रूप से त्रिकोणात्मक संघर्ष दिख रहा है । यह उपचुनाव सत्तारूढ़ झामुमो और भाजपा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है

घाटशिला उप चुनाव में त्रिकोणात्मक मुकाबला, सभी पार्टी जीत का कर रहे दावा

जमशेदपुर –  घाटशिला उप चुनाव में 11 नवंबर को मतदान शांतिपूर्ण सम्पन्न होने के बाद लोग 14 नवंबर को मतगणना का इंतजार कर रहे हैं और अपने अपने प्रत्याशियों की जीत होने का पार्टी के नेता और कार्यकर्ता दावा कर रहे हैं । वैसे देखा जाय तो घाटशिला में मुख्य रूप से त्रिकोणात्मक संघर्ष दिख रहा है । यह उपचुनाव सत्तारूढ़ झामुमो और भाजपा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है । झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने उपचुनाव जीतने और आदिवासी लोगों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी इस सीट पर कब्जाकर सरकार की साख कम करने की पुरजोर कोशिश की है। वहीं झामुमो महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि घाटशिला के लोगों ने भाजपा को हराकर दिशोम गुरु शिबू सोरेन और दिवंगत रामदास सोरेन को श्रद्धांजलि देने का फैसला किया है। जबकि दूसरी तरफ भाजपा की झारखंड इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू एवं घाटशिला उप चुनाव के भाजपा प्रभारी अभय सिंह ने कहा कि लोगों ने राज्य सरकार को उसके कथित आदिवासी विरोधी रवैये, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के लिए सबक सिखाने का फैसला किया है। हालांकि, चुनाव परिणाम का सरकार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 81 सदस्यीय राज्य विधानसभा में झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास फिलहाल 55 विधायक हैं जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास 24 विधायक हैं। घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में बंपर वोटिंग हुई जो सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक कुल 74.63 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड की गई है
इस उपचुनाव में 1.31 लाख महिलाओं सहित 2.56 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। कुल 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में डटे हुए थे , जिनके भाग्य का फैसला 14 नवंबर को होना है । वैसे मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ झामुमो के दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र एवं भाजपा नेता बाबूलाल सोरेन के बीच ही दिखती नजर आ रही है और चुनाव के दिन भी इन दोनों के बीच ही मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कांटे की टक्कर रही । चुनाव संपन्न होने के बाद दोनों पार्टी के नेता व कार्यकर्ता अपनी अपनी ओर से जीत का दावा कर रहे हैं । वहीं जयराम महतो की पार्टी के प्रत्याशी रामदास मुर्मू ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर त्रिकोणात्मक संघर्ष ला दिया है , जिससे झामुमो और भाजपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है । अब देखना है कि 14 नवंबर को मतगणना के दिन कौन बाजी मारता है और विजय श्री का ताज किसे मिलता है , वह अभी गर्त में है

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