16 दिनों में ही औंधे मूंह गिरी यूजीसी के नए नियम, सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक लगाई रोक
पिछले एक पखवाड़े से देश में यूजीसी ( युनिवर्सिटी ग्राटंस कमिशन) के नए नियमों को लेकर मचा हंगामा का फिलहाल पटाक्षेप होता दिखाई पड़ रहा है। यूजीसी के नए नियम 16 दिनों में ही औंधे मूंह गिरी और कोर्ट के आदेश के बाद इस नियम का विरोध कर रहे स्वर्ण समाज राहत महसूस कर रहे हैं

16 दिनों में ही औंधे मूंह गिरी यूजीसी के नए नियम, सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक लगाई रोक
चतरा- पिछले एक पखवाड़े से देश में यूजीसी ( युनिवर्सिटी ग्राटंस कमिशन) के नए नियमों को लेकर मचा हंगामा का फिलहाल पटाक्षेप होता दिखाई पड़ रहा है। यूजीसी के नए नियम 16 दिनों में ही औंधे मूंह गिरी और कोर्ट के आदेश के बाद इस नियम का विरोध कर रहे स्वर्ण समाज राहत महसूस कर रहे हैं। यहां बताते चले कि बीते 13 जनवरी को यूजीसी के नए नियम अमल में लाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर की है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। यूजीसी ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इनका देशभर में विरोध हो रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। यूजीसी के नए कानून का नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे। नए नियमों के तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया ये टीमें एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि यूजीसी ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं इससे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा




