शिक्षा और संस्कृति का संगम आदित्यपुर के विद्यालय में डाक विभाग द्वारा ‘ज्ञान पोस्ट’ अभियान का भव्य आयोजन
आधुनिक डिजिटल युग में संचार के पारंपरिक और विश्वसनीय माध्यम 'डाक सेवा' के प्रति भावी पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से डाक विभाग, सिंहभूम मंडल द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बसंत पंचमी के पावन पर्व के उपलक्ष्य में, न्यू कॉलोनी उत्क्रमित उच्च विद्यालय, आदित्यपुर के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान की नई दिशा दिखाई, बल्कि उन्हें डाक विभाग की कार्यप्रणाली से भी रूबरू कराया

शिक्षा और संस्कृति का संगम आदित्यपुर के विद्यालय में डाक विभाग द्वारा ‘ज्ञान पोस्ट’ अभियान का भव्य आयोजन


आदित्यपुर, जमशेदपुर- आधुनिक डिजिटल युग में संचार के पारंपरिक और विश्वसनीय माध्यम ‘डाक सेवा’ के प्रति भावी पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से डाक विभाग, सिंहभूम मंडल द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बसंत पंचमी के पावन पर्व के उपलक्ष्य में, न्यू कॉलोनी उत्क्रमित उच्च विद्यालय, आदित्यपुर के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान की नई दिशा दिखाई, बल्कि उन्हें डाक विभाग की कार्यप्रणाली से भी रूबरू कराया।


प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता और विभागीय नेतृत्व
यह आयोजन माननीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी की उस परिकल्पना का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे भारतवर्ष के विद्यार्थियों में पुस्तकों के प्रति प्रेम और जिज्ञासा जागृत करने का संकल्प लिया गया है। वरिष्ठ डाक अधीक्षक (सिंहभूम) उदयभान सिंह के कुशल निर्देशन में इस कार्यक्रम को धरातल पर उतारा गय इस मौके पर उप डाक अधीक्षक विश्वजीत रॉय और डाक निरीक्षक विकास वर्मा ने अपनी उपस्थिति से बच्चों का मार्गदर्शन किया।
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ज्ञान पोस्ट’ के माध्यम से विद्या का उपहार
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डाक विभाग की अभिनव सेवा ‘ज्ञान पोस्ट’ रही। सुश्री ज्योति कुमारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ‘ज्ञान पोस्ट’ की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि कैसे इस माध्यम से सुदूर क्षेत्रों तक पुस्तकों को सुलभ बनाया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान विभाग द्वारा बुक की गई पुस्तकों का वितरण बच्चों के बीच किया गया। साथ ही, बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु उन्हें नए स्कूल बैग और चॉकलेट प्रदान किए गए।


फिलेटली और पत्र लेखन: एक व्यवहारिक अनुभव
आज की पीढ़ी जो ईमेल और व्हाट्सएप की आदी है, उनके लिए डाक विभाग ने एक “लाइव डेमो” सत्र आयोजित किया:
डाक टिकटों की दुनिया: बच्चों को फिलेटली (Philately) के महत्व और दुर्लभ डाक टिकटों के माध्यम से इतिहास और संस्कृति को समझने की कला सिखाई गई।
पत्र लेखन प्रक्रिया: विद्यार्थियों को पोस्टकार्ड प्रदान किए गए, जिस पर उन्होंने अपने मित्रों और परिजनों को संदेश लिखे।
लेटर बॉक्स से गंतव्य तक: बच्चों ने स्वयं अपने हाथों से पत्र पेटी में पोस्टकार्ड डाले। इसके बाद विभाग द्वारा उन पत्रों को डाकिया के माध्यम से वितरित कराया गया, जिससे बच्चों ने संचार के भौतिक स्वरूप को जीवंत महसूस किया।
उत्साह और सराहना
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य एवं समस्त शिक्षक वर्ग ने डाक विभाग के इस प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से न केवल बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ता है, बल्कि उनमें रचनात्मक लेखन की रुचि भी पैदा होती है। डाक विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को विभाग की अन्य जन-कल्याणकारी योजनाओं, जैसे ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के बारे में भी संक्षिप्त जानकारी दी,
इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि तकनीक के इस दौर में भी ‘डाक’ की प्रासंगिकता और उसका भावनात्मक जुड़ाव आज भी उतना ही मजबूत है।




